हमें ध्रुवीकरण के खिलाफ जनआन्दोलन की ज़रूरत हैःसैयद सआदतुल्लाह हुसैनी

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नयी दिल्ली (ज़मीनी सच)- जमाअत इस्लामी हिन्द के अमीर (अध्यक्ष) सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि देश में बढ़ते ध्रुवीकरण का मुक़ाबला करने के लिए एक ऐसे जनआंदोलन की आवश्यकता है जो शांति और सांप्रदाकयिक सद्भाव को बढ़ावा देता है।जमाअत इस्लामी हिन्द के मुख्यालय में आयोजित मासिक प्रेस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह वास्तव में चिंता का विषय है कि देश में ध्रुवीकरण की एक परियोजना चलाई जा रही है जिसमें सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने के लिए क़ानून बनाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है और जिस तरह से चीजें आगे बढ़ रही हैं वे तीसरी दुनिया के देशों के तानाशाही शासन की याद दिलाती है। हाल ही में एक टिपण्णी के बारे में पूछे जाने पर कि ‘‘हिन्दू स्वाभाव से देशभक्त हैं’’ के जवाब में सैयद सआदुल्लाह ने कहा कि सांप्रदायिक प्रिज़्म के माध्यम से चीज़ों को देखना सही नहीं है। सभी समुदाय में अच्छे और बुरे लोग हैं। घृणा और नफरत का माहौल पैदा करना देश को खतरे में डालना है। ध्रुवीकरण को चुनौती देने की ज़रूरत है। मध्यप्रदेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की खबर के बारे में पूछे जाने पर अमीर जमाअत ने कहा कि हमारी फैक्ट फाइंडिंग टीम घटना स्थल पर मौजूद है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट भेजेगी। लेकिन उपरी तौर पर जो जानकारी प्रापत हुई है वह चिंताजनक है। अवाम, नागरिक समाज और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर इस बढ़ते ध्रुवीकरण को मुकाबला प्यार, सहिष्णुता और सद्भाव के साथ करना होगा। जमाअत इस्लामी हिन्द इस बढ़ते खतरे के बारे में सार्वजनिक जागरुकता बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश  कर रही है और हम सांप्रदायिक घृणा और हिंसा के खिलाफ एक सामाजिक और सार्वजनिक आंदोलन बनाना चाहते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अलीगढ़ मुस्लिम विष्वविद्यालय के सौंवे वर्षगांठ पर उदबोधन से संबंधित सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री अच्छ बातें कहते हैं मगर उनकी सरकार और मंत्रीगण उनके भाषणों और बातों का पालन नहीं करते हैं और उनके शब्द निरर्थक साबित हो जाते हैं। सरकार देश के सभी नागरिकों के लिए बनती हैं न कि किसी विशेष पार्टी या समुदाय के लिए। विभिन्न मुद्दों पर हमारा संदेश और पक्ष सरकार तक पहुंचता है। अगर सरकार चाहे तो हम किसी भी मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार हैं।कान्फ्रेंस की शुरुआत में प्रेस को ब्रीफ करते हुए जमाअत के उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि साल 2020 कई मायनों में असामान्य था और कई नए मानदंडों को निर्धारित किया। पुरी दुनिया को कोरोनावायरस महामारी का सामना करना पड़ा। जमाअत रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स (आरडब्ल्यूएफ) की रिपोर्ट पर चिंता प्रकट करती है जिसमें कहा गया है कि भारत पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के लिए घातक देशों में से एक है। जमाअत इस्लामी हिन्द किसानों की मांग का समर्थन करती है कि सरकार संसद में पारित तीनों कानूनों को निरस्त करे। जमाअत प्रदर्शनकारी किसानों की इस बात से सहमत है कि नया क़ानून एमएसपी सर्मथन मूल्य को समाप्त कर देगा जब तक एमएसपी पर खरीद की कोई गारंटी निर्धारित नहीं होगी। शरीया कौंसिल जमाअत इस्लामी हिन्द के सचिव ने कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि दवा के रूप में किसी भी निषिद्ध पदार्थ का सेवन वर्जित है। तथापि, अगर कोई अवैध पदार्थ गुणों और विशेषताओं के संदर्भ में पूरी तरह तरह से एक अलग चीज़ में परिवर्तित हो जाता है तो इसे स्वच्छ और वैध माना जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ विद्वान जो इस परिवर्तन नियम से असहमत हैं वे भी हलाल वेक्सीन की अनुपलब्धता की स्थिति में ऐसे वेक्सीन की मंजूरी देते हैं जिसमें निषिद्ध पदार्थ शामिल हैं, ताकि गंभीर हालात में मानवजीवन की सुरक्षा की जा सके।

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