आज़मगढ़:ऑनलाइन शिक्षा ग्रामीण इलाक़ों में पूरी तरह नाकाम

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आज़मगढ़।(ज़मीनी सच)  कोविड-19 महामारी के चलते स्कूलों द्वारा शुरू की गयी ऑनलाइन पढ़ाई ग्रामीण इलाक़ों में पूरी तरह नाकाम साबित होती नज़र आ रही है. इसकी वजह ढाँचागत बुनियादी सुविधाओं का अभाव और अभिभावकों की खराब माली हालत है. बिजली,इंटरनेट और कम्प्यूटर  जैसी बुनियादी सुविधाओं से महरूम बच्चों तक ऑनलाइन  तालीम की रोशनी पहुँचाना सरकार और शिक्षण संस्थानों के बड़ी चुनौती है।
आज़मगढ़ जनपद में ऑनलाइन तालीम से जहाँ एक तरफ काफी छात्र और छात्राएं लाभांवित  हो रहे हैं, वहीं एक बड़ी संख्या उन छात्र और छात्राओं की भी है जो अभी तक इस से वंचित हैं।डिजिटल युग में भी आज ग्रामीण इलाक़ों में बड़ी आबादी के पास स्मार्ट फ़ोन,लैपटॉप या कम्प्यूटर नहीं हैं। यदि कुछ अभिभावकों के पास स्मार्ट फ़ोन है तो वह इंटरनेट का खर्च वहन करने में समर्थ नहीं हैं।अभिभावकों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी यह व्यवस्था पूरी तरह नई है जिसके कारण दोनो ही इस व्यवस्था को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
जनपद  के  प्रतिष्ठित आज़मगढ़ पब्लिक स्कूल, कोटिला चेकपोस्ट के प्रबन्धक मोहम्मद नोमान सी ए ने स्वीकार किया कि  बहुत से अभिभावक ऐसे हैं जिनके पास स्मार्ट फ़ोन  नहीं है जिसके कारण वह अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने में असमर्थ हैं। जबकि स्कूल द्वारा फीस में छूट दी जा रही है ताकि किसी बच्चे की पढ़ाई में रुकावट ना आए।
शेख मसूद इण्टर कालेज, फरिहा के प्रबन्धक शेख़ अहमद मसूद का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई में सबसे बड़ी समस्या इण्टरनेट की आ रही है। कॉलेज की तरफ से ऑनलाइन पढ़ाई की मुफ्त सुविधा दी जा रही है इसके बावजूद  ग्रामीण  बच्चे इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।मदरसा हमीदिया,  के प्रधानाध्यापक इमरान अलीम ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा से सबसे अधिक प्रभावित मदरसे के छात्र हुए है, क्योंकि मदरसे के पास ऑनलाइन शिक्षा देने का कोई प्रबंध नहीं है और मदरसे के अधिकांश छात्र ग़रीब होते हैं, यदि मदरसा प्रशासन ऑनलाइन शिक्षा देने का कोई प्रबंध कर भी ले तो  अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई में होने वाले खर्च को वहन नहीं कर सकेंगे ।
फरिहा निवासी और चिकित्सक डॉक्टर इमरान अहमद का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और बिजली दोनो की समस्या है ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई  कर पाना बच्चों के लिए बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई कुछ स्कूलों की तरफ से सिर्फ फीस लेने का एक हथियार है और अभिभावकों को फीस वसूली के नाम पर तरह-तरह से डराया धमकाया जाता है।
तोवां, सरायमीर निवासी अभिभावक एहसान खान का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन पढ़ाई  पूरी तरह फेल है।अधिकतर अभिभावक और बच्चे इसके लिए तैयार नहीं हैं।
ग्राम सिरसाल  निवासी इन्तेखाब आलम का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था कानवेन्ट स्कूलों के बच्चों के लिए तो ठीक है लेकिन ऐसे बच्चे जो ग़रीब परिवार से आते हैं उनके लिए यह व्यवस्था पूरी तरह फेल है।

 

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